
मीना अग्रवाल (नेचुरोपैथी), (आगरा) 

आज की भागदौड़ भरी जीवनशैली, अनियमित खानपान, जंक फूड का बढ़ता चलन, शारीरिक निष्क्रियता और मानसिक तनाव के कारण फैटी लिवर (Fatty Liver) एक सामान्य लेकिन चिंताजनक स्वास्थ्य समस्या बन चुकी है। पहले यह बीमारी केवल अधिक आयु के लोगों में देखी जाती थी, किंतु अब युवा और किशोर भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। अच्छी बात यह है कि प्रारंभिक अवस्था में समय रहते जीवनशैली में सुधार करके इसे काफी हद तक नियंत्रित और कई मामलों में उलटा (रिवर्स) किया जा सकता है।
लिवर हमारे शरीर का सबसे बड़ा आंतरिक अंग है, जो भोजन को ऊर्जा में बदलने, पोषक तत्वों का भंडारण, विषैले पदार्थों को बाहर निकालने तथा शरीर के चयापचय (मेटाबॉलिज्म) को संतुलित रखने का कार्य करता है। जब लिवर की कोशिकाओं में आवश्यकता से अधिक वसा जमा होने लगती है, तब फैटी लिवर की स्थिति उत्पन्न होती है। यदि इस पर ध्यान न दिया जाए तो यह लिवर में सूजन, फाइब्रोसिस, सिरोसिस और गंभीर जटिलताओं का कारण बन सकता है।
फैटी लिवर मुख्यतः दो प्रकार का होता है— नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज (NAFLD), जो मोटापा, मधुमेह, इंसुलिन रेजिस्टेंस, उच्च कोलेस्ट्रॉल और असंतुलित आहार से जुड़ा होता है, तथा अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज (AFLD), जो अत्यधिक शराब के सेवन के कारण होता है।
योग शरीर और मन दोनों को संतुलित करने की एक प्राचीन एवं वैज्ञानिक पद्धति है। विभिन्न शोधों से संकेत मिलता है कि नियमित योगाभ्यास तनाव कम करने, वजन नियंत्रित रखने, इंसुलिन संवेदनशीलता में सुधार तथा स्वस्थ जीवनशैली अपनाने में सहायता कर सकता है। यही कारण है कि फैटी लिवर के समग्र प्रबंधन में योग को एक सहायक उपाय माना जाता है।
भुजंगासन पेट के अंगों में हल्का खिंचाव उत्पन्न कर रक्त संचार और पाचन क्रिया को सक्रिय करने में सहायक माना जाता है। अर्ध मत्स्येंद्रासन रीढ़ की लचक बढ़ाने के साथ उदर अंगों के क्षेत्र में रक्त प्रवाह को बेहतर बनाने में सहयोग करता है। वहीं धनुरासन पेट और कोर मांसपेशियों को सक्रिय कर पाचन तंत्र को मजबूत बनाने में उपयोगी माना जाता है। इन आसनों का अभ्यास प्रशिक्षित योग विशेषज्ञ के मार्गदर्शन में करना अधिक सुरक्षित रहता है।
हालाँकि केवल योग करना पर्याप्त नहीं है। फैटी लिवर से बचाव के लिए संतुलित एवं पौष्टिक भोजन, नियमित व्यायाम, वजन नियंत्रण, पर्याप्त जल सेवन, सात से आठ घंटे की नींद तथा तनाव प्रबंधन भी उतने ही आवश्यक हैं। भोजन में हरी पत्तेदार सब्जियाँ, साबुत अनाज, दालें, मौसमी फल और फाइबर युक्त खाद्य पदार्थ शामिल करें। वहीं मीठे पेय, अत्यधिक चीनी, तले-भुने और प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों से दूरी बनाए रखें। प्रतिदिन कम से कम 30–45 मिनट तेज चाल से पैदल चलना या अन्य एरोबिक व्यायाम करना भी लाभदायक है।
यह समझना आवश्यक है कि योग किसी भी बीमारी की दवा का विकल्प नहीं है। यदि लगातार थकान, पेट के दाहिने हिस्से में दर्द, पीलिया, अत्यधिक कमजोरी या अन्य गंभीर लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत चिकित्सक से परामर्श लें तथा आवश्यक जाँचें जैसे लिवर फंक्शन टेस्ट (LFT) और अल्ट्रासाउंड कराएँ।
स्वस्थ लिवर, स्वस्थ जीवन की आधारशिला है। यदि हम समय रहते अपनी जीवनशैली में छोटे-छोटे सकारात्मक बदलाव करें, नियमित योगाभ्यास करें और संतुलित आहार अपनाएँ, तो न केवल फैटी लिवर बल्कि अनेक जीवनशैली संबंधी बीमारियों से भी बचा जा सकता है। स्वस्थ शरीर, शांत मन और अनुशासित दिनचर्या ही दीर्घकालिक स्वास्थ्य का सबसे बड़ा मंत्र है।
“स्वस्थ लिवर, स्वस्थ जीवन—योग अपनाएँ, संतुलित जीवनशैली अपनाएँ।”
— मीना अग्रवाल लेखिका
नेचुरोपैथी, आगरा

